हेलो दोस्तों मैं शहज़ादी हूं, आज मैं एक नई सेक्स स्टोरी लेकर आ गई हूं जिसका नाम है “डॉक्टर से चुदकर बनी माँ चुतिया पति अनजान-doctor sex story” यह कहानी प्रीती की है आगे की कहानी आपको प्रीती बताएंगी मुझे यकीन है कि आप सभी को यह पसंद आएगी।
मैं मिताली आज अपने बेडरूम में बैठी हूँ। मेरा पेट पाँच महीने का हो गया है।(doctor sex story)
मेरे चूचे दो पके तरबूजों की तरह भारी और रसीले हो गए हैं, जो मेरी नाइटी में मुश्किल से समा रहे हैं। मेरे निप्पल सख्त और बड़े हो गए हैं, और मेरी गांड मोटी और मुलायम हो गई है। जब भी मुझे वो दिन याद आता है, मेरी चूत गीली हो जाती है—जब डॉक्टर साहब ने मुझे चोदा और मेरे पेट में अपना बीज बोया।
मेरे पति रजत को अभी सच्चाई नहीं पता, लेकिन मेरी यादें मुझे हर रात सताती हैं। आओ, मैं तुम्हें सब कुछ विस्तार से बताती हूँ।
यह जनवरी की ठंडी सुबह थी। दिल्ली की सड़कों पर कोहरा छाया हुआ था। मैं उस समय 29 साल की, गोरी, भरे बदन वाली औरत थी। मेरे चूचे दो पके आमों की तरह बड़े और गोल थे, जो हमेशा मेरी साड़ी से बाहर निकलते रहते थे।(doctor sex story)
मेरी कमर पतली थी, और मेरी गांड मोटी और लचीली थी, जो चलने पर मर्दों की नज़रों को अपनी ओर खींचती थी। मेरी जांघें मोटी और चिकनी थीं, और मेरी चूत हर रात मेरे पति रजत के लंड की भूखी रहती थी। लेकिन छह महीने तक हमारी कोशिशें बेकार रहीं- मैं गर्भवती नहीं हो पा रही थी। रजत मुंबई चला गया था और मैं अकेली थी। मेरी चूत की आग बढ़ती जा रही थी और मैंने डॉक्टर को दिखाने का फैसला किया।
हमारे इलाके में एक नया क्लिनिक खुला था- डॉ. अर्पित शर्मा का। मैंने सुना था कि वे एक मशहूर प्रजनन विशेषज्ञ हैं। मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। मेरा ब्लाउज़ टाइट था और मेरे चूचे उसमें फँसने को तरस रहे थे। मेरा पल्लू बार-बार खिसक रहा था और मेरी गहरी क्लीवेज दिख रही थी।
क्लिनिक में सन्नाटा था। मैं अंदर चली गई। डॉ. अर्पित मुझे देखकर खड़े हो गए। वे 38 साल के थे, गोरे, लंबे और खूबसूरत। उनकी चौड़ी छाती और गहरी आँखें किसी को भी लुभा सकती थीं। उनकी मजबूत बाँहें उनकी शर्ट के ऊपर से दिखाई दे रही थीं। “मिताली जी, बैठिए। क्या परेशानी है?” उन्होंने अपनी मखमली आवाज़ में पूछा।(doctor sex story)
मैंने शर्माते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, मैं बच्चा पैदा नहीं कर पा रही हूँ। मेरे पति छह महीने से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।” उसने मेरी तरफ देखा, उसकी नज़र मेरे चूचो पर रुक गई। “मिताली जी, चिंता मत करो। मैं पूरी जाँच करूँगा,” उसने कहा और मुझे जाँच की मेज पर लेटने को कहा।
मैं लेट गई। मेरी साड़ी मेरी जाँघों तक सरक गई। उसने मेरी साड़ी को और ऊपर उठा दिया। मेरी गोरी जाँघें नंगी हो गईं। मेरी चूत मेरी पैंटी में छिपी हुई थी, लेकिन उसकी आँखें उसे भेद रही थीं। “मिताली जी, मुझे आपकी चूत देखनी है,” उसने कहा और मेरी पैंटी नीचे खींच दी। मेरी चूत नंगी हो गई। ठंड के कारण मेरे हल्के जघन बाल सिकुड़ गए थे, और मेरी चूत की दरार थोड़ी गीली थी।(doctor sex story)
“डॉक्टर साहब, आप क्या कर रहे हैं?” मैंने शरमाते हुए पूछा। “मिताली , यह एक टेस्ट है। चुप रहो,” उसने कहा और अपनी मोटी उंगली मेरी चूत में डाल दी। “आह…डॉक्टर साहब…” मैं हांफने लगी। उसकी उंगली मेरी चूत में गहराई तक जा रही थी। मेरी चूत टाइट थी, और मैं उसकी उंगली चूस रही थी।
“मिताली , तुम्हारी चूत गर्म और टाइट है। मुझे कोई दिक्कत नहीं दिख रही,” उसने कहा। उसने अपनी उंगली बाहर खींची- वह मेरे माल से गीली थी। “डॉक्टर साहब, यह गलत है,” मैंने कहा, लेकिन मेरी चूत को फिर से उसकी उंगली चाहिए थी।
उसने एक और उंगली डाली। “आह… और डालो… आह…” मैं चिल्लाई। मेरी चूत से माल टपक रहा था। “मिताली , तुम्हें लंड चाहिए। मैं तुम्हें माँ बना दूँगा,” उसने फुसफुसाया। मैं शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी बातों से मेरी चूत और भी गीली हो गई।(doctor sex story)
उस पहली मुलाकात के बाद, मैं पूरी रात तड़पती रही। जब भी मुझे उसकी उंगलियाँ याद आती, मेरी चूत गीली हो जाती। मैंने फिर से अपॉइंटमेंट लिया। इस बार मैंने एक टाइट नीली कुर्ती और लेगिंग पहनी थी। कुर्ती में मेरे चूचे उभरे हुए थे और मेरे निप्पल थोड़े से दिख रहे थे।(doctor sex story)
लेगिंग में मेरी गांड टाइट और सेक्सी लग रही थी। क्लिनिक में उसने मुझे देखकर मुस्कुराया। “मिताली , क्या तुम फिर से आई हो? क्या तुम अभी भी बच्चा चाहती हो?” उसने पूछा। “हाँ डॉक्टर साहब, मैं माँ बनना चाहती हूँ,” मैंने कहा। उसने मुझे फिर से टेबल पर लिटा दिया।(doctor sex story)
“मिताली , मैं आज पूरी जाँच करूँगा,” उसने कहा और मेरी कुर्ती ऊपर उठा दी। मेरे चूचे ब्रा में कैद थे। उसने मेरी ब्रा खोल दी। मेरे big boobs नंगे हो गए। मेरे निप्पल गुलाबी और सख्त थे, और ठंड में उभरे हुए थे। “मिताली , तुम्हारे चूचे बहुत गर्म हैं,” उसने कहा और एक चूचे को अपने मुँह में ले लिया।
उसकी गर्म जीभ मेरे निप्पल पर फिसल गई, और उसने उसे चूसना शुरू कर दिया। “आह… डॉक्टर साहब… चूसो… आह्ह…” मैं कराह रही थी। उसका दूसरा हाथ मेरे दूसरे चूचे को जोर से दबा रहा था। मेरे चूचे लाल हो गए, और मेरे निप्पल उसके मुँह में सख्त हो गए। उसने मेरे निप्पल को हल्के से काटा। “आह… मज़ा आ रहा है,” मैं चिल्लाई।
फिर उसने मेरी लेगिंग नीचे खींची। मेरी चूत नंगी थी। मेरी फांकें गीली और लाल थीं। “मिताली , तुम्हारी चूत को लंड की ज़रूरत है,” उसने कहा और अपनी पैंट उतार दी। उसका 8 इंच का लंड सख्त, मोटा और काला था। उसका टोपा गीला और चमक रहा था, और उसकी नसें उभरी हुई थीं।(doctor sex story)
“डॉक्टर साहब, यह क्या है?” मैंने शरमाते हुए कहा। “मिताली , यह आपका इलाज है,” उसने कहा और मेरी टाँगें चौड़ी कर दीं। मेरी tight chut पूरी तरह खुल गई। मेरी जाँघें मोटी और गोरी थीं, और मेरी गांड टेबल पर फैली हुई थी। उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा।
उसकी गर्मी मेरी चूत को छू रही थी। “आह… डालो… चोदो मुझे,” मैं चिल्ला रही थी। उसने एक जोरदार धक्का दिया। उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। “आह… डॉक्टर साहब… यह फट गया है… आह…” मैं चिल्लाई।
उसने मेरे चूचो को दबाते हुए मुझे चोदना शुरू किया। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ रहा था। हर धक्के के साथ मेरी गांड हिल रही थी और मेरे चूचे हवा में उछल रहे थे। “मिताली , तुम्हारी चूत बहुत टाइट है। मैं तुम्हें प्रेग्नेंट कर दूंगा,” उसने कहा। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं और उसका पसीना मेरे चूचो पर टपक रहा था।
“डॉक्टर साहब, ज़ोर से… मेरी चूत को फाड़ दो,” मैं चिल्ला रही थी। मेरी चूत गीली और लाल हो गई थी और मेरा माल उसके लंड से चिपक रहा था। उसने मेरे चूचो पर थप्पड़ मारे। “आह्ह… मेरे चूचे चूसो,” मैंने कहा। उसने मेरे एक चूचे को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा।(doctor sex story)
उसकी जीभ मेरे निप्पल को चाट रही थी और उसका mota land मेरी चूत को चोद रहा था। उसने मुझे करीब आधे घंटे तक चोदा। “मिताली , मेरा माल ले लो,” उसने कहा और मेरी चूत में झाड़ दिया। उसका गर्म माल मेरी चूत में भर गया और मेरी चूत उसे चूस रही थी।
“डॉक्टर साहब, आपने क्या किया?” मैंने हाँफते हुए कहा। “मिताली , इससे तुम्हें बच्चा हो जाएगा,” उसने हँसते हुए कहा। उसके बाद मैं हर हफ्ते जाने लगी. अगले हफ्ते मै फिर गयी मैंने साड़ी पहनी हुई थी ब्लाउज में मेरे चूचे उभरे हुए थे और मेरा पेट थोड़ा चपटा लग रहा था. वो मुझे अपने केबिन में ले गया. “मिताली , आज मैं तुम्हारी गांड भी चोदूंगा,” उसने कहा. उसने मेरी साड़ी उतार दी.(doctor sex story)
मैं नंगी थी. मेरे चूचे हवा में लटक रहे थे और मेरी चूत गीली थी. उसने मुझे टेबल पर झुका दिया. मेरी moti gand गोल और मुलायम थी और उसकी दरार में पसीना चमक रहा था. “डॉक्टर साहब, धीरे से,” मैंने कहा. उसने मेरी गांड पर थूका और अपनी उंगली मेरी गांड में डाल दी. “आह… धीरे से…” मैं सिसक उठी. उसकी उंगली मेरी गांड चोद रही थी.
फिर उसने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा. “मिताली , मैं तुम्हारी गांड फाड़ दूंगा,” उसने कहा और एक जोरदार धक्का दिया. “आह… डॉक्टर साहब… फट गई… आह…” मैं चिल्लाई. उसका लंड मेरी गांड में पूरा घुस गया. वो मेरी ass fuck करने लगा. उसकी उंगलियां मेरी चूत में थीं और वो मेरी चूत भी चोद रहा था.
“मिताली , तुम्हारी गांड बहुत बढ़िया है,” उसने कहा। उसका लंड मेरी गांड फाड़ रहा था, और मेरे चूचे हवा में लटक रहे थे। “डॉक्टर साहब, मेरी चूत भी चोदो,” मैंने कहा। उसने मुझे घुमाया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।(doctor sex story)
“मिताली , मैं तुम्हारी चूत में फिर से माल गिराऊंगा,” उसने कहा। उसने मेरी चूत को जोर से चोदा। “आह्ह… जोर से… फाड़ दो इसे,” मैं चिल्ला रही थी। उसने फिर से मेरी चूत में माल गिराया। उसका गर्म माल मेरी चूत से बह रहा था।
अगले महीने की शुरुआत में, मुझे सुबह उल्टी होने लगी। मेरे चूचे भारी लग रहे थे, और मेरा पेट थोड़ा उभरा हुआ था। मैंने प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया- यह पॉजिटिव था। मैं डॉक्टर के पास गई। “मिताली , मैंने तुम्हें माँ बनाया है,” उसने हँसते हुए कहा।
“डॉक्टर साहब, क्या यह आपका बच्चा है?” मैंने डरते हुए पूछा। “हाँ मिताली , मेरा माल तुम्हारी चूत में बह गया है,” उसने कहा। मैं शरमा गई, लेकिन मेरी चूत फिर से गीली हो गई। “डॉक्टर साहब, अब क्या?” मैंने पूछा। “मिताली , मैं तुम्हारी चूत फिर से चोदूंगा,” उसने कहा और मुझे फिर से टेबल पर लिटा दिया।
उसने मेरे चूचे चूसे और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। “आह… मुझे चोदो,” मैं चिल्लाई। उसने मुझे फिर से चोदा, और मेरी चूत उसके माल से भर गई।(doctor sex story)
अब मैं पाँच महीने की गर्भवती हूँ। मेरे चूचे दूध से भरे हुए हैं, और मेरा पेट गोल हो गया है। डॉक्टर साहब अभी भी मुझे चोदते हैं। हर हफ़्ते मैं उनके क्लिनिक जाती हूँ। वह मेरे चूचे चूसते हैं, मेरी चूत चोदते हैं, और मेरी गांड चोदते हैं।
“मिताली , तुम्हारा बच्चा मेरा है, लेकिन तुम्हारी चूत मेरी रंडी है,” वह कहते हैं। मैं शरमा जाती हूँ, लेकिन इसका मज़ा लेती हूँ। रजत , मेरे पति, अभी भी अनजान हैं। मेरी चूत अभी भी डॉक्टर साहब के लंड के लिए तरसती है। मैं क्या कर सकती हूँ? यह बच्चा पैदा होने वाला है, और मेरी चूत की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है।(doctor sex story)
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